Monday, May 3, 2021

बंगाल चुनाव 2021 समीक्षा


बंगाल चुनाव 2021 परिणाम चौंकाने वाले रहे हैं भाजपा को 100 से कम सीटों की उम्मीद ना होगी । रैलियों के अंबार बड़े-बड़े मंत्री ऐसी गाड़ियां बंगाल मैं बहुत घूमी । संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का व्यापार कुछ समय से बंगाल चुनाव के फेरे ले रहा था। 
 2 मई को जनता का निर्णय संपूर्ण देश में देखा।  कई राजनीतिक जानकारों की गणना चुनाव में धराशाई हो गई।  तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा को भयंकर राजनीतिक पटकने दी है।  भाजपा प्रवक्ता इस हार को तार्किक मानदंडों की कसौटी में जीत में पलटने में लगे परंतु उन्हें आत्म चिंतन एवं मंथन करने की आवश्यकता है। उन्हें असंवेदनशील भाषा, ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत आरोप लगाने , अतार्किक के कारण, अभद्र एवं उत्तेजित भाषा का प्रयोग करने से कठोर प्रतिबंध की आवश्यकता है।
 जय पराजय जीवन का एक भाग  है कार्य संपन्न होने के पश्चात कार्यों को और बेहतर तरीके से करने के लिए कार्यों की समीक्षा आवश्यक है।  बंगाल चुनावों  में  भाजपा की हार के कुछ बिंदु रेखा अंकित करने का प्रयास कर रहा हूं
1. Petrol, diesel, Rasoi gas मूल्यों में   बढ़ोतरी पर सरकार द्वारा अनावश्यक रूप से अड़ा रहना। बढ़ोतरी को पार्टी का तंत्र सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक  आधार द्वारा आम जनता को नहीं समझा पा रहा है।  प्रवक्ता एवं मंत्रियों द्वारा दिए गए कथन यूपीए-2 के मंत्रियों एवं नेताओं से मेल खा रहे हैं
2. बेरोजगारी के मुद्दे पर बड़े नेताओं द्वारा चुप्पी साध ली जाती है समर्थन में बड़े ही अजीब से तर्क दिए जा रहे हैं । स्वरोजगार संबंधी योजना की प्रवक्ताओं द्वारा कोई चर्चा नहीं की जा रही है पार्षद से लेकर कैबिनेट मिनिस्टर केवल बड़े-बड़े आंकड़े प्रस्तुत करने में व्यस्त हैं शिक्षित एवं मिडिल क्लास युवाओं को योजना एवं तर्क हवा हवाई लग रहे हैं।
3. केंद्रीय नेतृत्व द्वारा क्षेत्रीय मुद्दों की चर्चा लगभग ना के बराबर की गई है वर्तमान युवा पीढ़ी केंद्र एवं विधानसभा चुनावों के मध्य अंतर समझती है अतः जब भाजपा द्वारा विधानसभा चुनावों में केंद्रीय मुद्दों को रखा जाता है तो उसे बड़ी ही सहजता होती है एवं आमजन के मध्य उपेक्षा का भाव उत्पन्न होता है। 
4. बंगाल चुनावों को नाक का मुद्दा बनाना भाजपा की बड़ी गलती है
5. भाजपा द्वारा रैलियों में अनावश्यक राजनेताओं की सक्रियता से बीजेपी को भारी हानि का सामना करना पड़ रहा है यह प्रयोग मध्य प्रदेश के दमोह उपचुनावों में, बिहार चुनाव में विफल रहा है राजनेताओं की अनावश्यक सक्रियता ने चुनाव में बंगाली अस्मिता को ठेस पहुंचाई है कभी-कभी ज्यादा मिठास होने से भी भोजन का स्वाद बिगड़ जाता है।
 6. भाजपा के कई नेताओं को यह कहते हुए सुना है कि वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का कोई भी विकल्प उपलब्ध नहीं है यह कथन अपने आप में ही आत्मघाती है अभी भाजपा विजय से बहुत दूर है इस प्रकार का विचार पुराने किए गए संपूर्ण कठोर परिश्रम को नष्ट करने वाला सिद्ध होगा। 
7. बंगाल में मुख्यमंत्री पद का चेहरा ना होना भी भाजपा हेतु हानिकारक रहा है जनता के सम्मुख दिल्ली जैसी परिस्थिति खड़ी कर दी गई है जहां पर किसी को भी मुख्यमंत्री बना दिया जा सकता है भाजपा द्वारा बनाए गए नए मुख्यमंत्रियों में केवल योगी आदित्यनाथ एवं सर्वानंद सोन बोले ही सफल दिखाई दे रहे हैं अन्य राज्यों में मुख्यमंत्रियों की लोकप्रियता बहुत ही निचले स्तर पर है यह मंथन योग्य विषय है
8. सरकारों को चतुर एवं चालाक नहीं दिखना चाहिए आम जनमानस के मध्य सरल एवं सहज होना चाहिए राजनेताओं द्वारा दिए जाने वाले अप्रसांगिक तर्कों से जनता का मन दुखी होता है
9. चुनावों में हारने के पश्चात सोशल मीडिया में राज्यों के मतदाताओं को कार्यकर्ताओं एवं  राजनेताओं  द्वारा मूर्ख कहना बहुत ही असहनीय एवं कष्टदायक है

Monday, July 6, 2020

Free Education from License

INDIA,  a hub of education since ancient time. As claimed by many historian, India an best education system in world. It had produced high quality students, who had worked for world peace and welfare. There is number  of examples available.

Education system was not govern by any license. Entire system was based on quality. Teacher with knowledge  can teach without any fear and license. His responsibility to produce good quality education.

What is happening in current days, If a person want to  teach. He has following two option

1. Open Coaching Classes
2. Open School.

1. Open Coaching Classes: As the education system weaken and English medium school grown. Student IQ level decreased. After the school classes, they need backup of coaching classes.   A single person can open coaching classes, teach    quality education but can not provided degree. Now a days best and quality education is provided by coaching not schools. Coaching institutes are well, I always appreciate them. They are in open competition with quality of education not other pointer like college building and facility. They can concentrate only on education.

2. Open School:  in Last twenty years, Hardly any teacher has open any famous college. The big universities, schools are opened by business tycoons. I say only 10 % of them actually teaching for nation building and quality of education. Rest of them are teaching for money.

To produce quality education, it must be free from license raj.  As bussiness can be open in with partnership and proprietor y, why educational institution can  be open with proprietory.

Teacher must allow for free Teaching, Open and Individual competition in the field of education




 


 

Monday, May 6, 2019

STOP using for PLASTIC, start with small

1 year 350 days has gone after the ban on plastic. Before 24 may 2017, people say government could pass a law for the novel cause   and ban the plastic bags. Therefore government did it. But we observing that plastic becomes indispensable part of human file. All the small good can be easily carried out traditional India jhola. Now, Jhola is not use.  People have forget their Jhola mindset. There are just depend on plastic bags. I have talked to seller why give plastic bags, they all shown their helplessness for various reasons like competition with neighboring shop, cost, people force them to have plastic bag etc.  Thousands of plastic carry bags are used in every morning for carrying milk to home. They can used steel dabba for same. It will also save environment as well as quality of their milk.
They must rstart culture carrying India Jhola and Dabbas, which had save our planet since many centuries. The culture of use and throw  can create such critical condition for entire human.

STOP using for PLASTIC, start with small.

Sunday, April 29, 2018

पकोडे बेचना स्वभिमान की बात


    देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने बयान दिया कि पकोडा बेचना भी रोजगार है। इसके बाद अमित शाह ने इस बात का समर्थन किया है। और त्रिपुरा के मुख्य मंत्री का बयान है कि आप सरकारी नौकरी के पीछे न भागें आप पान की दुकान या दूध की दुकान भी खोल सकते है। जिसमें मुख्य मंत्री विपलप देव के ब्यान को तो उन्होने विवादित बयान ही कह डाला है।
      इन तीनों बयानों का  मीडिया ने पागल सांड जैसा  व्यवहार प्रारंभ कर दिया। जैसे गांवों में अगर नंदी को कोई बात पसंद न आये तो वह अकारण ही आपको मारने के लिये दौडता है।
     इसके बाद बात आती है विपक्षी दलों की उन्होने प्रधान मंत्री के बयान के बाद बडे बडे धरने दिये है। कई ने पकोडे के लिये नारे भी बनाये है। कई ने तो एसी कारों एवं फाइव स्टार होटले से बाहर आकर चौराहों पर पकोडे  भी खाये है। अच्छा लगा कि  विषेष उस समय पकोडे वालों की बिक्री में थोडी सी गा्रेथ देखने का मिली है। उसके पश्चात् राजनीतिज्ञों ने भी बयानों में पकोडे के लिये खासा प्रेम  दिखाया है।  अतः कहने का तात्पर्य की इन सभी की भयंकर आलोचना की गई है। और यह उचित भी है।
      अब वास्तविक बात करते है जिस प्रकार मीडिया एवं विपक्षी दलों ने छाटे काम करने वालों का काम के आधार पर घोर अपमान किया है यह निंदनीय है। क्या मीडिया एवं विपक्ष कहना चाह रहा है कि केवल जो सरकरी नौकरी द्वारा जीवन में धन का अर्जन करते है केवल वे ही देष सेवा करते है। एवं उन्हे ही समाज में सम्मान प्राप्त करने का अधिकार हैै। जो लोग स्वतंत्र होकर स्वयं का रोजगार करते व े समाज में सम्मान पाने के अधिकारी नही है। हमारे देष में छोटे छोटे काम करने वाले हजारेों प्रकार के रोजगार है। इनकी दृष्टि वे सब बेकार है। समाज में उनका कोई स्थान नही है।  मेरे घर के सामने से सब्जीवाला, फुल्की वाला, चाट वाला, नुक्कड के पास पानवाला, दुधवाला, जुते की सिलाई करने वाला, सिल की टकाई कनरे वाला, गन्ने का जूस बेचने वाला, फल वाला, पकोडे वाला यह सभी समाज के अंग है जैसे कोई सरकारी नौकरी करने वाला होता है। यह सभी सम्मान के  हकदार है । और इन्हे समाज सम्मान देता है। यह लेाग न हो तो व्यापारिक लुटेरे जो 500 रूपयें बाल काटते है और 100 रू की काफी बेचत है लूट का महौल उत्पन्न कर दें ।
  मीडिया एवं विपक्षी दलों का व्यवहार बडा स्तब्ध करने वाला है। इन्ही छोटे छोटे व्यापारियों ने देष को पूजीपतियों एवं बडी बडी विदेषी कंपनियों के हाथों में जाने से रोका है। अन्यथा विदेषों में तो लोग की हैसियत बाल कटवाने की भी नही है। ऐसा अनुभव मेरे दोस्तों ने  बताया है। परंतु मेरे भारत में बाल कटाने एवं दाडी बनाने की सेवा मात्र 30 से 70 रू में प्राप्त की जा सकती है। अब इतनी बडी सेवा इतने कम दामें में उपलब्ध हो सकती है तों इस काम में क्या बुराई है। और हम किस आधार पर इन्हे छोटा कह रहे है।
    दुनिया में अगर आपकी भावना सेवा करने की है तो आप के द्वारा किये गये  सभी कार्य महान है। इस बात को कबीर दास जी, संत रविदास जी ने सिद्ध किया है।  और किसी कार्य को छोटा समझना बहुत ही छोटी और गिरी हुई मानसिकता का प्रतीक है।
बल्कि पहले कहा जाता है किसानी को सबसे उत्तम, व्यापार को मध्यम एवं नौकरी को नीच कर्म की श्रेणी में रखा जाता था ।
 

Monday, April 23, 2018

Cast Politics: Set Balance between All



Cast System was to resolve the problem of ancient times.   Many hindu  scripture has clarified about the cast system.  Most basic on is that cast of the person is not decided by their birth or family that is decide by people KARMA.
Now a days, Many political parties or Group running  cast based agendas, reservation, cast movement and many more things in Indian land. Opposition saying, current government would remove reservation therefore Government says no one can remove the reservation. Both are extremist.
Ground for the General election 2019 has been prepared in 2014, when BJP won election, Hindu has voted them irrespective of cast.  So when Congress has been research about data, they may have found correct reason. Now they working to break the vote of hindu into different cast. So they can share bit of hindu votes.
I pray to god, some in country would work to make balance between different cast like old ancient times, when without dalit no one can start any of the ritual. Like Dalit would eat first in any marriage in country. It is still functionary in north India.   Many ritual from birth to death cannot be completed without dalit (Sevaks).
World would be more beauty full from two eyes. Not from one eyes.
India need to set the balance between all the Cast. We are one. All the cast people should talk with each other.

Friday, April 20, 2018

Killing Democracy: Chief Justice Dipak Misra Faces Impeachment Motion

     
Impeachment of CJI Deepak Misra, I am not able to rationalize the this act. Why opposition is so keen. A judge killed or died naturally. Supreme court has justified and given verdict. You can review the judgement. But I think, this is just camouflage. And they just misusing Judge LOYA case. Actually, I may guest that they targeting CJI for different matter that is “Ram Temple”. CJI has fix the hearing date and people perception is that most probably issue will resolve soon. This cannot be digested by Opposition specially by Congress. Because they think that If Ram temple will be constructed , they cannot alleged BJP for deceit. So that they are betraying faith of Indian people.

Congress and other opposition parties are killing democracy of the country for their political gain. Indian public will not spare them for their deed. Opposition and Congress is afraid of Ram Mandir hearing. Which will be started from 27 April 2018 because Veepaksh thinks that if Ram Mandir issue will resolve they will not win election any more. Their thought had been represented by Lawyer Kapil Sibbal in hearing of Ram Mandir.

To hinder Ram Mandir issue, they are blackmailing Supreme Court and attacking CJI Deepak Mishra. Congress must be exposed for their blackmailing.
I dont have any proof this but this article written according discussion with public and reflecting the public perception. 

Saturday, March 17, 2018

Current Education System in India

India has 800+ universities and 40000+ colleges.  Large money is induced by Governments and parents for education. Big Buildings, Large campuses, expensive labs and library are being created by using this money but outcome is not up to the mark. Governments are worrying about the growth of education industries not education, student, and teachers. These are basic building block for quality education.

Education: No parameter for education quality.

Student: They are being treated like a customer or product. Who are getting facilities for paying heavy fees?

Teachers:   They are being exploited. Not independent. work for organizational growth not for student growth. No competence at for  teaching.  


Friday, March 16, 2018

Fault in Implementation of GST


   Goods and Services Tax in India. Congress is strongly misguiding the Indian people about GST and they are successful also. GST may have various problems and issues but overall it is good for India.
   But if it is good for our country then why people are opposing it. Fact is that  Aam Janata is not against of the GST. Businessmen involved in black are distorting the image of GST. They created phobia about GST.  Small retailer/ Seller/Hawker finally influenced by Big Businessmen (Dealers and Distributors).
   Phobia among Dealers and Distributor is formed because the way GST implemented was wrong.  Finance Minister is Good Advocate and Administrative also but he is failed to understand voice of people and also failed to express his voice to people.   Finance Minister must transform himself as Teacher (Friendly Teacher) who explains his student everything without any irritation. No explanation and description are given. Bill is passed in LokSabha and RajyaSabha. It was executed while It must explained first then should be implemented.  GST implemented like NOTEBANDI while there is no need to do this.
There is no criticism for anyone but we should look forward for Growth of India. He must be very careful. I feel following should be execution of the GST.

There must be four steps to execute GST.
    1.    Preparation for GST
    2.    Explanation of GST into Public and Businessmen (Through Educational       Conferences/Public Meeting/ Rallies).
    3.    Finance Minister should Roam Entire country to Explore and show the   Advantages.
    4.    Then Final GST should be implemented.

Thursday, September 8, 2016

अपनी भाषा से कितना प्यार करते हैं, गूगल को बताइ

ये एक सच्चाई है कि भारत में 95 फीसदी लोग इंडिक भाषा (हिंदी समेत तमाम भारतीय भाषाओं) में ही संवाद करते है। लेकिन इंटरनेट पर स्थिति आज भी उलटी है। यहां अब भी 95 फीसदी कंटेट अंग्रेजी में ही जेनेरेट हो रहा है। सिर्फ 5 फीसदी कंटेट ही हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में जेनेरेट होता है। लेकिन अब ये स्थिति बदलने वाली है। जैसे जैसे भारत में इंटरनेट की पहुंच बढ़ रही है, स्पीड बढ़ रही है, स्मार्टफोन्स गांव-कस्बों में पहुंच रहे हैं, वैसे वैसे भारतीय भाषाओं में कंटेट भी अधिक जेनेरेट होने लगा है।

गूगल भारत में अपनी योजनाएं इन संभावनाओं के अनुरूप ही बना रहा है। इसी के तहत गूगल अपनी ट्रांसलेट कम्युनिटी को मजबूत करने के लिए प्रयासरत है। दो भाषाओं को जानने वाला कोई भी व्यक्ति इसके लिए योगदान दे सकता है। जैसे कि आप हिंदी और अंग्रेजी जानते हैं और अंग्रेजी के शब्दों या छोटे जुमलों (Phrases) को सही हिंदी में अनुवाद कर सकते हैं, तो आपका स्वागत है। आप हिंदी से अंग्रेज़ी में भी ट्रांसलेट कर सकते हैं। हिंदी ही नहीं आप अन्य भाषाओं को जानते हैं तो भी आप उनके अनुवाद में सहयोग कर सकते हैं। मान लीजिए कि आप हिंदी और गुजराती दोनों जानते हैं तो आप इनके एक-दूसरे के ट्रांसलेशन में भी मदद कर सकते हैं।

इसके अलावा आप पहले से ट्रांसलेट हुए शब्दों की गुणवत्ता को चेक कर भी सहयोग दे सकते हैं। आपको क्या करना है, आप इस लिंक पर जाकर समझ सकते हैं- https://translate.google.com/community

अगर आप गूगल के इस आयोजन में शामिल होना चाहते हैं तो देर किस बात की, अधिक से अधिक शब्दों या शब्द-युग्मों (Phrases) का ट्रांसलेशन कर अपनी प्रिय भाषा के प्रोत्साहन में योगदान दीजिए। इसे ऐसे समझिए कि कोई गूगल सर्च पर जाकर किसी शब्द का अनुवाद ढूंढता है और उसे सही उत्तर मिलता है तो उसे कितना अच्छा लगता है। आपको स्वयं भी कई बार ऐसी सर्च की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में अपनी भाषा के त्रुटिरहित अनुवाद का बड़ा बैंक बनाने में आफ महत्ती योगदान दे सकते हैं।

एक बात और, गूगल अगस्त के पूरे महीने हर कॉन्ट्रिब्यूटर (योगदानकर्ता) के ट्रांसलेशन का पूरा रिकॉर्ड रखेगा। ऐसे में सोच क्या रहे हैं, आइए, गूगल के साथ जुड़ कर अपनी भाषा के प्रचार-प्रसार में हाथ बंटाएं। इसके लिए बस आपको इस लिंक पर छोटे से फॉर्म को भरना होगा...http://bit.ly/2as7TMv.

Sunday, November 29, 2015

बालीबुड फिल्मों में शिक्षक का चित्रण एवं शिक्षक

आज का विषय वर्तमान समाज में शिक्षक की स्थिति को प्रदर्षित करने वाला है। या आप कह सकते है कि फिल्मों में बार बार शिक्षक का  अपमान  किये जाने से में आहत हॅू वह भी भारत देश् में जहां गुरूओ का स्थान ईष्वर से भी उपर है।
बहुत  ही प्रसिद्व फिल्म है जो कि राजकपूर के निर्देश्न में बनी हैं इस फिल्म का नाम है मेरा नाम जोकर कहतें है कि इस चलचित्र में बहुत ही गहराई है परंतु एक शिक्षक दृष्टि से यह फिल्म एक काला धब्बा है मुझे लगता है कि यह पहली फिल्म होगी जिसमें एक छोटे से लडके को अपनी वयस्क शिक्षका पर वासना भरी नजरों से देखता हुआ दिखाया गया है जिस देश् में शिक्षका को माता का स्थान दिया जाता है। क्या उस समय हजारो लाखों छात्रों के मन में इस चित्र का नाकारात्मक प्रभाव नही रहा होगा। क्या यह चित्र देखने बाद छात्रों के मन में शिक्षका के प्रति माता या बडी बहन के भाव रह पाये होगें। परंतु शिक्षक समाज द्वारा इसका विरोध करना बहुत ही दुखद है।
कुछ समय से   तो यह देखने में आता है जैसे फिल्मों में तो शिक्षकों को अपमानित करनें का वीणा उठा लिया है। इस प्रकार की फिल्मों में केवल छात्रों द्वारा शिक्षकाओं का वासना भरी नजरों से देखना सही बताया जाता है एव ंशिक्षकों को प्रताडित किया जाता है।  छात्रों द्वारा की गई हिंसा को सही दिखाया जाता है यह सारे अपमान फिल्म के हीरो द्वारा किये जाते है। क्या समाज में केवल इसी प्रकार उदारण देखने को आतें है। क्या शिक्षक अपना आत्म सम्मान भूल चुके है। जब इस देष का शिक्षक ही आत्म सम्मान खो  चुके है। तो आने वाली पीडी कैसे आत्म सम्मान की रक्षा कर पायेगी।
अभी बनी कुछ फिल्मों पर मै आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूॅंगाः
1. फिल्म का नाम है शमिताभ फिल्म में दक्षिण में स्टार धनुष, महानायक अमिताभ बच्चन,अक्षरा हसन आदि है। फिल्म की हीरो गंूगा है एवं वह कक्षा में जाता है शिक्षक उसे डांटता है वह शिक्षक को मारता है, बच्चे ताली बजाते है शिक्षक वहां से भाग जाता है। यही गूंगा बच्चा बाद में जाकर फिल्म का हीरो बनता है। एवं इसी बच्चे से बयस्क बने छात्र के लिये महानायक अमिताभ बच्चन उनकी आवाज देते हैै वह फिल्मों का बहुत ही बडा हीरो बनता है
संदेषः  इस फिल्म संदेश् जाता है कि अगर बच्चे या छात्र  शिक्षक पिटाई करे तो वह समाज में बहुत ही सम्मानीय स्थान पाता है।
2. फिल्म का नाम है हम्टी शर्मा की दुल्हानियां फिल्म में मुख्य कलाकार के तौर डेविड धवन सुपुत्र, आलिया भटट, आश्तोश् राणा है। फिल्म सीन है हम्टी  - फिल्म का हीरो शिक्षक को झूले पर लटकाता है एवं शिक्षक की भांजी छात्र को कहती है वह परीक्षा की कापी चेक करती है सबसे दयनीय स्थिति तब होती है जब फिल्म के अंत में इसी हम्टी लडके से शिक्षक की भांजी का विवाह होता है।

फिल्म समाज का दर्पण होती है।  यह दर्शक में मन में बहुत ही गहरा प्रभाव छोडती है बहुत सारी घटनाये फिल्मों में वास्तविक जीवन से जुडी होती है। छात्र जो फिल्म देखतें है वह फिल्म के उस हीरो जैसा बनना तथा दिखना चाहते है। इसके लिय छात्र एवं छात्राऐ ंनायकों एवं नायिकाओं के समान केश् संवारना, कपडे पहनना, जूत आदि धारण करतें है। चहरे पर लाली, बिन्दी आदि का प्रयोग करते है। यह मौलिक परिवर्तन जो फिल्म से आम जीवन तक आता हेै यह स्वीकार्य होता हैै  परंतु जब नकारात्मक चारित्रिक परिवर्तन फिल्मों से समाज तक आने लगे तो यह बहुत ही दुखदाई हो सकता है।

वर्तमान में फिल्में छात्रों का चरित्र हास एवं मानसिक हास का कारण बनी हुई है। जिसमें फिल्मों के नायक बहुत सारी बुराईयां होती है परंतु वह नायिकाओं का प्रिय होता हैं। वह शिक्षक एव शिक्षकाओं का अपमान करता है प्रताडना देता हैै परंतु वह अभी भी नायक हैै यही चरित्र छात्र महाविद्यालयों में अपनातें जा रहें है

समाज में शिक्षक का असम्मान पूरे समाज को नष्ट कर सकता हैै यह छात्र-अभद्रता महाविद्यालयों एवं िवद्यालयों से निकलकर आपके घर परिवार, विवाह कार्यक्रम, रास्तों एवं अन्य स्थानों पर पहुचतीं है। यह छात्र छात्राएं चित्रपट देखकर व्यवहार करते हैै। इस व्यवहार का प्रभाव उनके सम्पूर्ण जीवन मे होता है। मुझे उज्जैन की एक घटना याद आती है जब उज्जैन के विष्वविद्यालय में एक छात्र ने अपने ही शिक्षक के सर पर हाथ से मारा एवं उसके पष्चात् प्रध्यापक की मृत्यु हो गई, छात्र का राजनैतिक प्रभाव था वह कारागार से मुक्त भी हो गया क्या इस प्रकार का व्यवहार समाज में उचित हेै छात्र संघों के नेता शिक्षक पर हाथ उठायें, गाली गलौच करें एवं प्रताडित करें यह तो एक समान्य सी घटना हेै। जिसे शिक्षकभी बहुत निरसता से व्यवहार करता है एवं बगल में खडा पुलिस महकमा नौ दो ग्यारह हो जाता है। 

वर्तमान में शिक्षक का स्वाभिमान नष्ट हो चुका है शिक्षक केवल धन पिपासु बन कर रह गयें है। उनकी सारी क्षमताए केवल चर्चाओं तक सीमित हो गई है। क्योंकि जो स्वयं के सम्मान के प्रति जागरूक एवं एकजुट हों सके, वह समाज एवं छात्रों को देश् के लिये क्या एकजुटता एवं एकत्व का पाठ पढायेगा  फिल्मों में होने वाले भददे एवं अष्लील मजाको पर वह हंस कर उत्तर देता है एवं स्वयं को बहुत छोटा एवं हंसी का पात्र का समझता है। यह तो शिक्षक की विकृत मानसिकता या कहें गुलामी के लक्षण ही कहें जायेगे कि वह बार बार अपमानित  किये जाने पर भी  किसी फिल्म/नाटक  के हास्य अभिनेता की तरह व्यवहार करता है।

शिक्षक को स्मरण करना चाहिए कि  शिक्षको का इतिहास गौरवमयी है जब धनहीन द्रोणाचार्य ने अर्जुन, भीम, आदि महावीरो का निर्माण किया हमें स्मरण करना चाहिए परषुराम जी को जिन्होने कर्ण जैसे महादानी का निर्माण किया। हमें याद करना चाहिए ऋषि संदीपनी को जिन्होने कृष्ण जैसे राजनीतिज्ञ का निर्माण किया हमें याद करना चाहिए उस चाणक्य हो जिसके पास  शरीर में दो कपडे एवं मस्तक में खुली हुई शिखा  के अतिरिक्त कुछ नही था परन्तु जो बडे बडे राजा/महाराजाओं की सेना नही कर सकी वह केवल केवल एक शिक्षक ने किया और सिंकदर को भारत से लौटने पर विवश् कर दिया
क्या वर्तमान शिक्षक वर्ग स्वयं को चाणक्य का वंश्ज नही मानता जो बार बार किये गये अपमान पर गांधी के तीन बंदन बन कर बैठ गया हैै। किसी के देखने से, किसी के सुनने से और किसी के कहने से सत्य बदलता नही है। इस प्रकार अनीति कार्य करने के कारण ही षिक्षक अपना अस्तित्व एवं सम्मान खो चुके है।

चाणक्य
शिक्षक समान्य नही होता है प्रलय एवं निर्माण दोनो ही शिक्षक  की गोदी में खेलती हैै